रामायण – प्रेम की कथा | राम को प्रणाम
रामायण है प्रारंभ से अंत तक, प्रेम की कथा, शुरुआत में है शिव शक्ति की प्रीत की व्यथा। प्रेम में जब उपजता है संदेह और आता है विपरीत परिणाम, सती का होता है पुनर्जन्म, प्रेम में नहीं आता व्यवधान! पार्वती का दृढ़ निश्चय मिला देता है दोनों को फिर से, शिव के साथ पार्वती का मिलन, हो हम सब के मन में। श्रद्धा और विश्वास का मिलन जब श्रोता के मन में हो जाए, राम कथा में प्रवेश करने का चित्त अधिकारी हो जाए। मनु और शतरूपा का प्रेम इतना कि, लगे संग तप करने में, विधि हरि हर सब हार गए, आएंगे परब्रह्म अब पुत्र रूप में। दशरथ और कैकयी का प्रेम तो जग विदित है, कौशल्या है पटरानी, उनका मात्र राम में चित्त है, सुमित्रा को प्रेम मिला महारानी कौशल्या से, प्रेम का प्रतिसाद मिला राम को सौमित्र से। राम का प्रेम सभी से है, राम से प्रेम सभी को है, लेकिन महाविष्णु की चिरसंगिनी, महालक्ष्मी सीता है। प्रेम जो प्रस्फुटित होता है, सीता और राम के पुष्पवाटिका में दर्शन से, पुष्ट हो उठता है, राम के धनुष भंग कर स्वयंवर में विजयी होने से। ...