Tuesday, March 31, 2020

Lockdown Day 7 Mar 31 2020

21 दिन!
आज सातवाँ दिन है !
रामचरितमानस का तेरहवाँ व चोदहवाँ मासपारायण।
राम के राज्याभिषेक की दशरथ ने मन में ठानी,
ले गुरु वसिष्ठ से आज्ञा, व्यवस्था भी कर डाली !
लेकिन विधि ने कुछ और विचारा, सुरकार्यहेतु,
शारदा ने प्रेरित की मंथरा, बन गयी कैकेयी हेतु ।
राम के अनुज भरत को राज्य, राम हेतु वनवास,
ऐसे वरदान माँगे कैकेयी ने, कैसा सत्यानाश। 

लेकिन हर बुराई में भलाई छिपी होती है ,
ऐसे ही हर भलाई के गर्भ में, कोई बुराई होती है। 
देवता, सदैव स्वार्थी होते हैं,
अपने कार्य हेतु, छल का सहारा लेते हैं। 
मानव अपने मन में, सालों का भविष्य बुन लेता है,
नॉवल कोरोना वायरस, सब चौपट कर देता है। 

लॉकडाउन करने के बाद भी, हो रहे सारे प्रयास,
मज़दूरों का सड़क पर, प्रवाह कम हुआ आज। 
लेकिन पूरी दुनिया में, पॉज़िटिव केस और मौतें,
थम ना रही, और बढ़ रही, सभी देशों में मौतें ।
परमात्मा ही लगायें पार, यही है अब आस,
रख कर विश्वास, कर रहा मानव पूरा प्रयास। 

Monday, March 30, 2020

Lockdown Day 6 Mar 30,2020

21 दिन!
आज छटा दिन है !
रामचरितमानस का ग्यारहवाँ व बारहवाँ मासपारायण।
राम विवाह का अनुपम वर्णन,
बारात का स्वागत - सत्कार !
चारों भाइयों के विवाह के बाद विदा,
एवं अवधपुरी में नववधुओं का आगमन। 

लॉकडाउन को सफल बनाने के लिए कर रही सरकार प्रयास,
चलते जा रहे भूखे मज़दूरों के लिए, बनाए जा रहे अस्थाई आवास।  
पंजाब एवं उत्तरप्रदेश, चालू कर रहे कुछ उद्योग,
राजनीति भी हो रही, बढ़ रहा कोरोना का रोग। 

रोग प्रतिरोधक क्षमता जगा रही कुछ आस,
भारत में न फैले संक्रमण, है यही प्रयास। 
दान करें, सेवा करे, अनावश्यक ना निकले बाहर,
सुरक्षित घर में रहे, ना डिगने पाए हमारा विश्वास!

Sunday, March 29, 2020

Lockdown Day 5 Mar 29,2020

21 दिन!
आज पाँचवाँ दिन है !
रामचरितमानस का नवाँ व दसवाँ मासपारायण।
धनुष भंग और सीता ने पहनाई, वरमाला राम को,
लेकिन समाचार ने क्रोधित किया, परशुराम को,
लक्ष्मण के व्यंगबाण क्रोध को बढ़ा देते हैं,
लेकिन राम के विनय से मुनि शीतल हो जाते हैं। 
दशरथ हर्षित हुए समाचार सब पाकर,
चल दिए जनकपुरी को, बारात सजा कर। 

लॉकडाउन से पीड़ा बढ़ गयी, गरीब मज़दूरों की,
यह बीमारी तो थी, विदेश घूमने वाले अमीरों की,
फ़ैक्टरी बंद हुई, कामगार दर बदर हुआ,
चल दिया घर को, अब कहीं का ना रहा। 
एक बेचारा दो सौ किलोमीटर चल कर गिर गया,
सबने कहा, हृदयाघात से मर गया। 
भूखे पेट वह चलता रहा दिल्ली से आगरा तक,
जब थका, अस्सी किमी शेष रहे तब तक।

कोरोनावायरस तो शायद जवान को बचा देता है,
भुखमरी, ग़रीबी का रोग, सभी को मार देता है। 
हल होना है सीमा को सील करने से,
राज्य, क़िला, शहर और हर ग्राम में,
हर नागरिक का लेना होगा सहयोग,
लॉकडाउन नहीं, काम के लायक़ ये लोग।  
सामाजिक दूरी सिखलाए हर नागरिक,
जीवन जिए, और काम करे, प्रत्येक नागरिक। 

इन हालात में भी बचेंगे, दिहाड़ी के ये मज़दूर,
क्योंकि ईश्वर भी है इनके विश्वास से मजबूर। 
इस देश के लोगों की रक्षा करेंगे श्री भगवान ,
हैं समर्थ, कर विश्वास, उनको अपना मान। 

Saturday, March 28, 2020

Lockdown Day 4 Mar 28,2020

21 दिन!
आज चौथा दिन है !
रामचरितमानस का सातवाँ एवं आठवाँ मासपारायण,
राम जन्म, बाललीला,
विश्वामित्र के साथ जनकपुरी आगमन,
पुष्पवाटिका में सीता एवं राम का प्रथम मिलन!

यह कैसा लॉकडाउन ?
हज़ारों प्रवासी मज़दूर कर रहे पलायन,
जाना चाहते हैं सभी अपने गृहनगर या गाँव को,
मरना ही है तो क्यों न अपने घर, 
अपनों के बीच, जाकर मरें। 
यहाँ जब काम नहीं, मज़दूरी नहीं,
अब रूकने का कोई लाभ नहीं। 
हज़ार पंद्रह सौ किलोमीटर चल पाएँगे क्या ?
बच्चों के साथ , राह में चल रहे लंगर के सहारे!

मन में रहे उत्साह, परमात्मा के प्रति अगाध विश्वास,
हम सब होंगे कामयाब, और देंगे एक दूजे का साथ।

Friday, March 27, 2020

Lockdown Day 3 Mar 27,2020

21 दिन!
आज तीसरा दिन है !
रामचरितमानस का पाँचवाँ एवं छटा मासपारायण,
रामावतार के कारण अनेक,
उनमें से वर्णित कुछ एक,
नारद ऋषि को व्यापी माया,
प्रतापभानु  ने विप्रों को, भूसुर मांस खिलाया,
शाप मिला, भगवान विष्णु को मानव देह,
नारी विरह और वानर सहायता का,
राजा प्रतापभानु को शाप मिला,
सपरिवार राक्षस जन्म लेने का। 
मनु शतरूपा को मिला वरदान,
परब्रह्म को पुत्र रूप में पाने का,
विप्र धेनु सुर संत हित,
लिया प्रभु ने निर्णय स्वयं पृथ्वी पर आने का !

लॉक डाउन  की सफलता के लिए भी,
आवश्यक है जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति,
लेकिन इसके लिए मंडियाँ खोलनी होगी,
फल सब्ज़ी, धान एवं अनाज की!
वयस्था करनी होगी ट्रक से माल ढुलाई की,
इसी का परिणाम होगा, लॉकडाउन की विफलता भी ! 

चाहिए सामाजिक दूरी, सहयोग सभी NGO का,
अनुशासन व शिक्षण हो समाज के हर व्यक्ति का, 
और कोई राह अभी है नहीं,
स्व-अनुशासन की हमारी प्रकृति नहीं ?
फिर क्या करें? सिवाय प्रतीक्षा के,
नहीं, घर पर बिठाने की अपेक्षा जनसहयोग लें!
हर व्यक्ति ज़िम्मेदारी ले, सामाजिक दूरी की,
काम करें भले कम, समझे वक्त की मजबूरी भी। 

राज्य की सीमा पार ना करे कोई,
जाँच करो विदेश से आए व्यक्ति व परिवार की ,
 चाहे लक्षण ना मिले कोई। 
तापमान जाँच के लिए scanner लगायें हर जगह,
जैसे रखवाए थे dustbin, पहले हर जगह। 
सभी संदिग्ध लोगों की निरंतर जाँच हो,
लॉक डाउन नहीं, दूरी का सम्मिलित प्रयास हो !

रहो निश्चिन्त, उत्साहित, करो सहयोग,
परमात्मा करेंगे कृपा, होगा दूर यह रोग !