Tuesday, November 3, 2026

राम नाम लिखते लिखते – तैरते पाषाण और गिलहरी का योगदान | राम को प्रणाम

कविता: एम. एल. गुप्ता

राम नाम लिखते लिखते, बीत गई सदियाँ,
कैसे आपके बारे में, जान गई ये दुनियाँ?
क्या बार बार कहने से, झूठ सच हो जाता है,
क्या नाम रटने से, राम प्रकट हो जाता है?
राम नाम सत्य है, इतना कि, मरने पर सब कहते,
राम नाम सत्य है, लेकिन जीते जी क्यों नहीं कहते?
जीते जी राम सदा संग रहते, हर जगह हर घड़ी,
राम भले ही याद करे, उन्हें याद करने की किसे पड़ी?

राम नाम लिख दिया था, किसी ने एक बार पाषाण पर,
भूल कर पत्थर अपना गुण धर्म, तैरने लगा था जल पर।
नल और नील थे अभियंता, सोच रहे थे कुछ चतुराई,
कैसे बनायें पुल समुद्र पर, जो दे सेना लंका पहुँचाई,
देखा कोने में बैठे हनुमान, लिया हाथ में एक पाषाण,
खोये थे अपनी धुन में, लिख दिया उस पर राम का नाम,
निहारा नज़र भरकर उसे, मन में किया राम को प्रणाम,
डाल दिया उसे जल में ऐसे, जैसे देवार्पित सुमन जान।

ये क्या हुआ, कैसा यह भौतिकी के नियम का अपमान,
तैर रहा पाषाण पानी पर, किसने कर दिया यह कमाल?
नल और नील ने कहा, बस अब हम पुल बना देंगे,
हम इसी दुविधा में थे, पानी पर पत्थर कैसे तैरेंगे?
हनुमान मुस्कुराये, बैठे थे ध्यान लगाये,
सोच रहे थे, यह खुला रहस्य किसे बतलायें?
राम नाम से हो जाता है, मानव का भवसागर पार,
पत्थर तैर रहे पानी में, इसमें कौनसा चमत्कार?

राम नाम लिखने से तैर जायेंगे पाषाण,
हो जायेंगे जानकर ये, प्रसन्न प्रभु श्रीराम।
राम भी आए समुद्र किनारे, उठा लिया एक पत्थर,
नाम से यदि तैर रहे, देखूँ मैं भी हाथ से इसे छोड़कर,
अरे! यह तो डूब गया, सब वानर हुए विस्मित खड़े,
हनुमान मुस्कुराये, जिसे छोड़ दोगे आप, उसे तो डूबना पड़े।
सबको चल गया पता, सन्मुख राम से बड़ा, राम का नाम,
राम मिलते हर रूप में सबको, नहीं बनता किसी का काम!

राम देखते रहे, पुल बनने लगा, वानर होने लगे तैयार,
एक गिलहरी खुद को सान धूल में, आ रही बार-बार।
राम मुस्कुराये, उस पर हाथ फिराया, दिया आशीर्वाद,
यत्किंचित योगदान तुम्हारा, सदैव विश्व रखेगा याद।
रहेंगे सदा तुम्हारे बदन पर, मेरे अंगुलियों के निशान,
बतायेंगे सभी को, दो सत्य के पक्ष में, गिलहरी सा योगदान।
कितने से ज्यादा महत्त्वपूर्ण है, तुम किस पक्ष में खड़े हो?
आगे बढ़कर कुछ करते हो, या लाचारी के भाव में पड़े हो?

जीवन में सभी के ऐसा अवसर अवश्य आता है,
नियम सारे टूट जाते, नाम चमत्कार दिखाता है।
मौका सभी को मिलता है, सत्य के पक्ष में खड़े होने का,
गिलहरी सा योगदान देकर, जीवन को सार्थक बनाने का।
मन भटकाता है, आलस या सुविधा का बहाना बनाता है,
या फिर समन्दर में लोटे से क्या होगा, यह भ्रम बनाता है।
याद रखना, सत्य हेतु खड़े होना, करना राम को प्रणाम,
और करना सत्य के पक्ष में, अपना यत्किंचित योगदान।
जय श्री राम!

— एम. एल. गुप्ता | राम को प्रणाम शृंखला | YouTube: @mlgupta

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