Tuesday, November 3, 2026

आओ दिवाली मनायें – अहंकार से प्रेम की यात्रा | राम को प्रणाम

कविता: एम. एल. गुप्ता

आओ दिवाली मनायें हम, दीपक जलायें सौहार्द का,
राम हमारे हृदय में आए, भाव जगा दें औदार्य का।
जीवन की सुमधुर राह में, हम सदा रहें अग्रसर,
यह ध्यान सदैव रहे हमें, प्रेम से भरे रहें निरंतर।
बाधा का स्वागत कर सकें, जिसे दूर स्वयं श्री राम करें,
आधा न हो अपना प्रयास, हम पूरा अपना काम करें।

जीवन सरिता बहती है, भावना के दो किनारे हैं,
अहंकार से प्रेम की यात्रा, करते मानव सारे हैं।
जितना अहंकार अपना, उतना ही दुःख जीवन में,
जितना प्रेम जग जाये, उतना ही सुख जीवन में।

जब भी सुख हमारे जीवन में, बढ़ा रहा हो अहंकार,
समझ लो कि भविष्य में, दुःख का धरातल है तैयार।
साधन से सुख जब मिले, बांटो कुछ भाग समाज को,
लेकिन ध्यान रहे यह बांटना, ना बढ़ाए अहंकार को।
माला, प्रणाम और प्रशंसा, अहंकार के झरने हैं,
इनके आगे प्रदर्शन, पैसे के लोभ के खतरे हैं।

अहंकार के रूप अनेक, खुद को भी पता नहीं चलता है,
मैं हूं विनम्र, निरहंकारी, यह अहंकार भी पल सकता है।
अपनी बुद्धि और ज्ञान का अहंकार, इतना प्रबल है,
सिवा राम की शरण के, और उपाय सब असफल हैं।

प्रेम नहीं है सरल रास्ता, इस मार्ग की अलग गाथा है,
अहंकार से मुक्त होकर ही, कोई प्रेम को जान पाता है।
जब माँग शून्य हो जाए, केवल देने का भाव हो,
प्रेमी से लेना मुझे कुछ नहीं, देने भले ही प्राण हो।
प्रेम गली अति साँकरी, ता में दो न समाय,
जब मैं रहूँ तब वो नहीं, वो है तो मैं नाय !

ऐसा प्रेम इस संसार में, सौभाग्य से ही होता है,
प्रेम में परमात्मा का, साक्षात दर्शन होता है।
सगुण साकार कृष्ण का, प्रेम ही तो है राधा,
ऐसा प्रेम किया राधा ने, उनके बिना कृष्ण आधा।

राक्षस के विनाश हेतु, भगवान का आना व्यर्थ है,
भृकुटि विलास से जो, प्रलय करने में समर्थ हैं।
किन्तु शबरी जैसे भक्त, प्रतीक्षा कर रहे होते हैं,
राम अनन्य प्रेम के कारण, ही अवतरित होते हैं।
प्रेमी भक्त हो सके कृतार्थ, इसीलिए आते हैं राम,
हम करें राम को प्रणाम, कर रहे कृपा निरंतर राम!

— एम. एल. गुप्ता | राम को प्रणाम शृंखला | YouTube: @mlgupta

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