कविता: एम. एल. गुप्ता
राम हमारे, मन में हमने; तेरा ही नाम, लिखा, रखा है!
लेकिन तुमने, हमसे मिलने, का विचार, नहीं, रखा है!!
फिर हमको, करना क्या होगा; यह कौन, बतलायेगा,
राम तो मिलने, रोज़ ही आता, कैसे जान, यह पाएगा?
राम तुम्हारे, मन में देखो, हम तो, आ ही जायेंगे,
राम, हमारा मन छोटा सा, तुमको कहाँ समायेंगे?
राम तुम्हीं ने, इस धरती पर, एक ठिकाना, बना दिया!
माता-पिता, साथी संतानों से, यह घर बार, सजा दिया!!
राम तुम्हारे नगर में रहते, काम तुम्हारा करते हैं!
जप माला, पूजा नहीं करते, न ध्यान तुम्हारा, धरते हैं!!
तुम ही जानो, तुम पहचानो, कैसे काम चलेगा मेरा!
तुम ही बताओ, तुम ही सुझाओ, यह मुख नाम रटे ना तेरा!!
राम मिलेंगे कभी तो हमको, कैसे यह भ्रम टूटेगा ?
सबने समझाया मुश्किल है, क्या जीवन ऐसे ही छूटेगा??
किसी ने कहा, तप से है मिलता, मुझसे कहाँ हो पाएगा?
किसी ने कहा इस माया में लिपटे, राम कहाँ मिल पायेगा??
राम तुम ही बताओ मुझको, क्या कुछ मैंने पाया यहाँ!
सब कुछ देने वाला तू ही, यह शरीर, माया और जहां!!
जो कुछ तूने दिया है उसको, अब और कौन संभालेगा?
मैं खुद ही हूँ तेरे हवाले, मुझे क्यों यह अटकायेगा??
कहते मेरे भीतर तू है, मैं कहता, बाहर भी तू है!
भीतर बाहर तू ही तू है, सारे रूपों में बस तू है!!
खेल में है रच लिया स्वांग, और पर्दा नहीं गिरायेगा!
इतना मन रमा दिया खेल में, तू भी याद न आयेगा!!
मौत के क्षण में जग सकता, पर बेहोशी से भरमाता है,
पर्दा गिरता, उठता लेकिन, जीव जान नहीं पाता है!!
यह खेल है अच्छा, इसमें, मजा तुझे भी आता है,
पर अपने रचे हुए जीवों से, प्रेम तुझे तरसाता है।
नहीं रहने देता जीवन को स्थिर, हर क्षण बदलता है,
भूला जीव भी विवश होकर, तेरी ओर ही चलता है!
मेरे जीवन में कितना दुःख है, ऐसा जीव सोचता है,
मैं और मेरा, यह ही दुःख है, ऐसा नहीं जानता है!!
खेल के लिए सब कुछ है मेरा,
खेल का नियम है केवल सेवा,
मेरा कहने से जो दुःख है,
तेरा कहते ही वो सुख है,
लेकिन खेल तो खेल है, यहाँ हर तरह का मेल है!
कैसे करना व्यवहार यहाँ, चलता नियम से खेल है!!
व्यवहार से चलता जगत, यह दूसरे के अनुरूप हो,
भाव से दुःख सुख होता, यह समझ के अनुरूप हो,
अपनी समझ अपने भीतर, इससे किसी को काम नहीं,
पीड़ा सुविधा मिले जीवन में, दुःख सुख फिर होगा नहीं,
लेकिन यह भीतर जानोगे, बाहर सब कुछ चलता रहेगा,
सबके साथ सभी का जैसा, व्यवहार ऐसे ही चलता रहेगा।
निश्चित ही सब हो जाता, जब राम भरोसे होता सब काम,
निश्चिंत हो जीवन का आनंद लें, करते रहें राम को प्रणाम।
— एम. एल. गुप्ता | राम को प्रणाम शृंखला | YouTube: @mlgupta
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