Tuesday, November 3, 2026

जब चुनने हों विकल्प | राम को प्रणाम

कविता: एम. एल. गुप्ता

जब चुनने हों विकल्प तुम्हें, क्या निर्णय तुम कर पाते हो?
कितना अपने मन की सुनते? कितनी बुद्धि लगा पाते हो?
जब जीवन में अवसर आता, चुनाव करना है तुम को !
स्वार्थ और व्यक्तिगत संबंध, के बिना बढ़ना है तुमको !!
क्या कर्तव्य पथ पर चलोगे? अपना स्वार्थ छोड़ पाओगे?
या अपने संबंधों के खातिर, अन्याय सहते जाओगे?
जब निर्णय परिचालित होंगे, सुविधा और स्वार्थ से!
जब टकराव टालने होंगे, शक्ति और अहंकार से!!

जहाँ कूटनीति और राजनीति, के पण्डित बैठे होंगे,
उपलब्ध होगा समय और, प्रतिष्ठित जन होंगे!!
आम आदमी और प्रजातंत्र, वहाँ खोखले शब्द होंगे,
बातें होंगी बड़ी-बड़ी, और दोगले लोग होंगे!!
तुम्हें चुनाव करना होगा, कि यहाँ बेहतर क्या होगा?
सोसाइटी का हित जिसमें हो, वो विकल्प चुनना होगा!

चुनाव नहीं होता कभी - अच्छे और बुरे के मध्य,
सदा ही होता आया है - बुरे और कम बुरे के मध्य!
तुम यह मानो कि - श्रेय भले किसी को मिल जाये,
अंतिम लक्ष्य पूरा हो- समय कितना भी लग जाये!
परिवर्तन ही बेहतर है, भूलो व्यक्तिगत अहंकार को,
धन्यवाद की अपेक्षा अनुचित, अपनाओ त्याग मार्ग को!

लोग कहेंगे कि - यह त्याग नहीं, अंगूर खट्टे हैं,
मत सुनो, ये सभी एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं !
यह कलियुग है, तुम पर भी हावी होगा अहंकार,
अपने जीवन लक्ष्य के अनुरूप, करो राह स्वीकार!
जिन लोगों के कारण, तुम्हारा जीवन है आसान हुआ,
पहले उन्हीं का हित करो, यही पहला काम हुआ!

व्यक्तिगत अहंकार से ऊपर, चुनो अपना परिवार,
अपने ग्राहक और कर्मचारी, इनके हित में हो सब काम!
ध्यान रखो कि ये सभी, उसी समाज का हिस्सा हैं,
समाज सेवा से मिलता अपवाद, ये धन्यवाद का किस्सा है!
गुटबाजी और अपना आदमी, कितना लाभ पहुँचाते हैं?
वक़्त पड़ने पर प्रारब्ध के अनुरूप, सभी बदल जाते हैं!

लेकिन इस परिवर्तनशील संसार में, जो सदा बना रहता है,
इतने सब विभिन्न रूपों में, जो सदा धड़कता रहता है!
जीवन के सभी रूप, और जिसे हम कहते निर्जीव भी,
एक तत्व सदा ही रहता, दिखे कोई भी रूप, या अरूप भी!
इसीलिए अपने चुनाव में, ध्यान रखो अपना कर्तव्य,
करो राम को प्रणाम, संसार नहीं, राम ही हैं प्राप्तव्य!

— एम. एल. गुप्ता | राम को प्रणाम शृंखला | YouTube: @mlgupta

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