नारी तू शक्ति है

कविता: एम. एल. गुप्ता

नारी तू शक्ति है,
माता है, भक्ति है !
जीवन की गंगोत्री है,
मंत्रों में गायत्री है,
पावनता तुझसे झरती है,
नारी अपवित्र कभी ना होती है !
सम्मान की तू सदा अधिकारिणी है,
कलंक तुझे देता, यह समाज की विडम्बना है,
दोषी यह समाज, जो करता तुम्हारी भर्त्सना है।
कभी चाहता है, तुम्हारे लिए वसन की मर्यादा,
कभी तय करता है, समय, स्थान या वाणी की मर्यादा !
नारी जो करती है, नर शिशु का लालन पालन,
क्या नहीं करना चाहिए, नर को भी समान मर्यादा पालन?

— एम. एल. गुप्ता | YouTube: @mlgupta

Comments