सुख में राम की याद – दुःख क्यों होता है? | राम को प्रणाम
कविता: एम. एल. गुप्ता
राम का नाम,
लेते सभी हैं,
राम हैं सभी के हृदय में,
यह मानते सभी हैं।
फिर यह दुःख क्यों होता है,
क्यों यह मन रोता है,
क्या पीछे छूट जाता है,
क्या मानव भूल जाता है ?
क्यूँ लगता है कि मैं अकेला हूँ,
गम और किस्मत का मारा हूँ।
जिनका मैंने उपकार किया,
न उन्होंने मेरा साथ दिया,
न जिनको मैंने साथ दिया,
उन्होंने मेरा काम किया।
कौन आता है मेरे पास अब,
किसको मुझसे अब काम है ?
ऐसा लगता कि अब मेरा,
सहारा सिर्फ राम नाम है।
इन दुःख का कारण यह नहीं कि,
राम मेरे साथ नहीं हैं,
दुःख का कारण सिर्फ यह कि,
सुख में राम की याद नहीं है।
राम सदा साथ दें,
यह आशीर्वाद किसलिए ?
राम साथ ही सदा,
अलग हो ही न सके।
लेकिन राम के साथ रहते हुए,
उनको याद रखते हुए,
कैसे होगा गलत काम ?
मन कैसे करेगा प्रमाद ?
इसलिए मन भरमाता है,
संसार की याद दिलाता है।
इन्द्रियाँ अपने अपने विषय से,
जब होती हैं एकाकार,
मन डूब जाता भंवर में,
मन में छा जाता है संसार।
अहंकार जाग्रत रहता है,
जीव भ्रमित होता है,
भूल जाता है राम को,
सुख दुःख में खो जाता है।
एक लहर चलती है मन में,
मिल जाती है संसार सागर में,
संसार और मन एक हो जाते हैं,
अब राम कहाँ याद रह पाते हैं ?
ज्योंही राम की याद जाती है,
सुख दुःख की सत्ता खो जाती है।
राम की याद ही राम बाण उपाय,
राम की याद से दुःख न छू पाय।
कुन्ती ने कहा कृष्ण को,
कि दे दो दुःख का वरदान,
क्योंकि दुःख में सदा रहती याद,
मैं भूलती नहीं भगवान।
जो सुख है, वह छद्म है,
उसे निश्चित ही बदलना है,
जो दुःख है, वह भी छद्म है,
उसे भी निश्चित बदलना है।
लेकिन दुःख में छटपटाता है मन,
तड़पता है अहंकार और तन-मन,
फिर एक दिन आदत हो जाती है,
या परिस्थिति बदल जाती है।
दुःख नहीं रहता,
दुःख की याद रह जाती है।
सुख नहीं रहता,
सुख की याद रह जाती है।
और दोनों ही याद
दुःख का कारण बन जाती हैं,
संसार की हर याद
दुःख-सुख से भरी है,
या फिर भविष्य की,
उम्मीदों से जुड़ी है।
राम अवतार लीला में,
सीता के लिए दिखे दुःखी,
लक्ष्मण को शक्ति लगी,
राम दिख रहे दुःखी।
यह मानव रूप में,
ईश्वर की लीला है,
मानव के वेश में,
परब्रह्म की लीला है।
दुःख सुख में रहकर,
कैसे कर्तव्य निभाना है,
अपनी पत्नी के लिए दुःखी,
पर सुग्रीव को बचाना है।
अपने भक्त हनुमान को,
महिमान्वित करना है,
शेषावतार भाई को,
मूर्च्छित रहना है।
दूसरे का दुःख दूर करें,
दूसरे को यश प्रदान करें,
अपने दुःख को भूल कर,
अपने सुख का दान करें।
मानव को यह सिखाने को,
प्रेम की लीला निभाने को,
लेते हैं अवतरण,
राम और कृष्ण।
राम हैं वर्तमान,
आज, अभी, यहीं,
दुःख सुख है नहीं,
हैं राम, हर कहीं।
राम को रखें याद,
राम करें सब काम,
राम सदा साथ में,
करें राम को प्रणाम।
— एम. एल. गुप्ता | राम को प्रणाम शृंखला | YouTube: @mlgupta
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